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शुक्रवार, 6 मार्च 2015

एक एहसाश

एक बार मैं कही पर बैठा था एक गाना बज रहा था ।।
"करिये ना कोई वादा किसी से करिये ना।करिये-
करिये तो फिर तोड़िये ना।
वादा किसी से करिये ना।"

ऐ गाना मेरे दिलो दिमाग में ऐसा असर किया जानो ये एक लकीर की तरह हो गयी।समय ये भी आया की एक दिन मैने किसी से ऐसा वादा भी कर दिया भाऊकता में की कहिये मत।पर ये भी सच था की मैंने एक समय अंतराल तक का दिया था।
          अंतराल भी ख़तम पर तब भी हम वास्तविकता को न समझ सका।किसी ने खूब ही कहा है ।भगवान सही लोगो की मदत जरूर करता है।मै अपने वादे से हटा भी नही और जिस दिखावे की वास्तविकता को मैं जानना चाह रहा था वो मुझे चल गयी।तब से ये बात मुझे समझ में आ गयी की गुस्सा और भाउक्ता में लिए गए निर्णय सही नही होते।
    पर एक बात समझ में भी आ गयी की लोगो को पहिचान पाना आसान नही हैं।

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