सोमवार, 28 अक्टूबर 2019
पहलवानी गाँव की
गाँव में अब परम्परागत चीजे लुप्त हो रही हैं उनमे एक है पहलवानी ।गाँव का अखाड़ा इस बार सुना सुना दिखा जो कभी लोगो के सुबह सुबह इकठ्ठा होने का एक जगह होती थी।कुछ लड़के अपने घर पर ही देशी जिम को बना रखा हैं मैन भी उसका आनन्द लिया पर आखडे के लाइफ को मिस किया ।पुरानी परम्पराओं का खत्म होना अच्छी बात नही हैं.।सायद समय के अनुसार अब उसकी महत्ता न रही पर अगर देखे तो आज कुश्ती प्रतियोगिता की महत्ता है बस स्वरुप बदला है स्टाइल बदली है अब रेसलिंग ने इसी रूप को लिया है ।अगर ये रूप में बदलाव को देख कर वर्क होता तो परम्परा चलती रहती और महत्व दिखता।इसके अतिरिक्त इसका प्रभाव गाँव में लोगो के स्वाथ्य पर भी दिख रहा हैं।युवाओं की शरीर पहले जैसी गठीली नही रही और लोग तरह तरह के विमारियों के चपेट में आने लगे है।इसके अतिरिक्त अखाड़ा लोगो के आपसी सहमति को बनाये रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता था।अब इसके खत्म होने से दूरिया लोगो के बीच बढ़ी हैं।गाँव की संस्कृति खत्म हुई है प्रभावित हुई है।
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